Saturday, April 17, 2010
भोजन में किसके साथ क्या न खायें ?
मांस व दूध साथ-साथ सेवन न करें।* दही गर्म करके व गर्म चीजों के साथ न खायें।* खिचड़ी के साथ खीर, मट्टा के साथ बेल फल कभी न खायें।* कांसे के बर्तन में दस दिन तक रखा घी नहीं खाना चाहिए। * पका हुआ खाना, ठंडा काढ़ा फिर से गरम करके सेवन नहीं करना चाहिए।* अनेक प्रकार के मांस एक साथ नहीं पकाना चाहिए। * करेला के साथ दही व दूध वर्जित है। * सरसों के तेल में कबूतर का मांस नहीं पकाना चाहिए।* मछली के साथ गुड या शहद नहीं खाना चाहिए।* उडद दाल अधिक गरमी में नहीं सेवन करना चाहिए।* सरसों का साग सिर्फ ठंड में ही खाना चाहिए।
अजवायन
*अजवायन से कैलशियम,फासफोरस,लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं।*अजवायन प्रबल कीटनाशक है। यह पेट में सड़न रोकने वाली सभी औषधियों में उत्तम है।*प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है।*प्रसव उपरांत इसका प्रयोग गर्म शोधक होता है। प्रसूति ज्वर व कमर का दर्द ठीक करता है। गर्भाशय की गंदगी साफ करती है। गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है। दूध ज्यादा उतरता है।*पाचन के लिये अजवायन बहुत महत्वपूर्ण है। पेट दर्द, अफारा, कफवात,बवासीर आदि में बहुत हितकारी है।*अजवायन को सरसों के तेल में डाल कर पकायें उससे बच्चों को सर्दीजुकाम में तथा प्रसव उपरांत मालिश करें लाभ होगा।*दोपहर को भोजन के उपरांत चौथाई चम्मच पिसी अजवायन फांक लेने से खाना आसानी से हजम हो जाता है।*अजवायन को पान में रखकर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है।*यदि किसी के पैर में कांटा चूभा हो, तो अजवायन गुड मिलाकर बांधने से कांटा अपने आप निकल जाएगा।
शक्तिवर्धक फल और सब्जियां
1. नींबूः उबले हुए एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर पीते रहने से शरीर के अंग में नयी स्फूर्ति का अनुभव होता है। नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। मानसिक दुर्बलता दूर होती है। अधिक काम करने से भी थकावट नहीं आती है। ये नींबू पानी बिना चीनी-नमक के एक-एक घूट पीना चाहिए। अधिक बीमारी के बाद खाना खाने से कहीं ज्यादा नींबू पानी से स्फूर्ति आती है। पर रोज-रोज नहीं लेना चाहिए,आपका मोटापा कम हो जाएगा।2. एक कप उबला पानी में एक चुटकी सेंधा नमक,एक चुटकी काला नमक, एक चम्मच चीनी, दस बूंद नींबू का रस, भूना हुआ जीरा चौथाई चम्मच मिलाकर पिये। इसे चाय की जगह पर पी सकते है, यह पाचन शक्ति, शारीरिक शक्ति बढ़ता है। बीच-बीच में पीते रहे रोज सुबह शाम नहीं।3. सेबः सेब में एसिड होता है। यह आंतों, यकृत व मस्तिक के लिये उपयोगी है। इसमें फॉसफोरस होता है, जो पेट साफ करता है। सेब, विटामिन व खनिज से भरपूर है।सेब काटकर उस पर उबलता पानी डालें जब पानी ठंडा हो जाये, तो सेब को मसल कर उसका शर्बत बनाये मिठास लाने के लिये मिश्री डालें। यह शरीर को शक्ति व स्फूर्ति देता है। गठिया रोग में दो सेब रोज खायें।4. पपीताः अच्छा पका हुआ पपीता ही खाना गुणकारी है। खाली पेट पपीता खाना ज्यादा लाभदायक होता है। इसके बाद दोपहर को भोजन के बाद पपीता खाने से भोजन ठीक से हजम हो जाता है। पपीता सेवन से रक्तवाहिनी शिराये कठोर नहीं होती रक्त सुचारु रूप से रहता है। ह्दय रोग में सबसे ज्यादा लाभदायक है।5. आमः आम खाने से रक्त बहुत पैदा होता है। दुबले लोगों का वजन बढ़ता है। शरीर में स्फूर्ति आती है।6. अंगूरः ताजे अंगूर का रस कमजोरी को दूर करता है। यह रक्त बनाता है और रक्त पतला करता है। आपको मोटा करता है। श्वेत प्रदर में लाभ होता है। गर्भ का बच्चा स्वस्थ्य व बलवान होता है। शरीर को आयरन(Iron) मिलता है।7. मोनक्काः सर्दी के मौसम में मोनक्का लाभप्रद है। बीस मोनक्का गरम पानी में धोकर रात को भिगो दें। प्रातः पानी पीले तथा इसे खा लें। इसे नित्य प्रयोग करने से रक्त व शक्ति उत्पन्न होती है। दुर्बल और कमजोर रोगी को मोनक्का का पानी रोज पिलाये।8. आंवलाः इससे सारे रोगों को दूर करने की शक्ति होती है। आंवला युवक को यौवन प्रदान करता है। इसमें विटामिन-सी सर्वाधिक होता है। एक आंवला दो संतरे के बराबर होता है। आंवला शक्ति का भंडार है। आंवला किसी प्रकार भी खाये स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है।9. केलाः भोजन के बाद केला खाने से ताकत मिलती है। मांसपेशियां मजबूत होती है। वीर्यवर्धक होता है। केला फल नहीं है। इसे रोटी की जगह खाना चाहिए। एक समय में तीन से अधिक केले नहीं खाना चाहिये। ताजा केला खाना सर्वोत्तम है। प्रातः दो केले पर थोड़ा सा घी लगाकर खाकर ऊपर से दूध पीयें। इससे शरीर पुष्ठ रहता है।10. अमरूदः इसमें विटामिन-सी 300 से 450 मिग्रा तक होता है। ह्दय को बल, शरीर को स्फूर्ति देता है।11. छुआराः इससे कैलशियम बहुत मिलता है। इसे खाकर ऊपर से दूध पीने से हड्डियों के सभी रोगों से निजात मिलता है।12. गाजरः रोज आधा गिलास शहद मिलाकर गाजर का रस पीने से कमजोरी दूर होती है। रक्त बढ़ता है।13. मूलीः गन्धक, पोटाश, आयोडीन, कैल्शियम, लोहा, फॉसफोरस, मैग्निशियम, क्लोरीन मूली में बहुतायत पाया जाता है। एक मूली रोज खाने से हड्डियां मजबूत होगी। ह्दय शक्तिशाली रहेगा।14. टमाटरः प्रातः नाश्ते में एक ग्लास टमाटर का रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर पिये। चहेरा टमाटर की तरह लाल हो जायेगा। स्मरण शक्ति बढ़ती है। हाईब्लड प्रेशर घटता है। भूख बढ़ती है। खून बढ़ाता है। रक्त में लाल कणों को बढ़ाता है। टमाटर में लोहा दुगना पाया जाता है। बच्चे को टमाटर का रस पिलाने से बलवान हष्टपुष्ट रहते हैं। बड़ी आंतों को ताकत देता है। उनके घाव को दूर करता है।15. आलूः आलुओं में मुर्गों के चूजों जैसी प्रोटीन होती है। बड़ी आयु वालों के लिये भी प्रोटीन होती है, छोटे बच्चे जो भोजन नहीं कर सकते उन्हें आलू उबाल कर या खिचड़ी में पकाकर देना चाहिये। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन व विटामिन-सी होताहै.16. लहसुनः दिन में तीनों बार खाने के साथ खाने से बल बढ़ता है। पाचन शक्ति ठीक होती है। प्रातः चार दाने खाकर दूध पीने से वीर्य बढ़ता है। नपुंसकता जाती है। यदि लहसुन नियमित खायें तो बुढापा जल्दी नहीं आता। झुर्रियां नहीं पड़ती हैं क्योंकि धमनियों के सिकुडने से झुर्रियां पड़ती, त्वचा पर चमक आती है, रक्तचाप कंट्रोल करता है।17. मूंगफलीः इसमें प्रोटीन व चिकनाई अधिक मात्रा में पाई जाती है। इसकी चिकनाई घी से मिलती जुलती होती है। मूंगफली खाने से दूध बादाम घी की कमी पूरी होती है। अण्डे के बराबर प्रोटीन पाई जाती है। यह गर्म होती है इसलिए सर्दियों में खाना चाहिये, गरम प्रकृति के व्यक्तियों के लिये हानिकारक है ज्यादा खाने से पित्त बढ़ता है। गर्भावस्था में नित्य मूंगफली खाने से शिशु की प्रगति में लाभ होता है। कच्ची मूंगफली खाने से दूध पिलाने वाली माताओं को दूध बढ़ता है। सर्दियों में सूखापन आता हो तो मूंगफली के तेल, गुलाब जल मिलाकर मालिश करें। सूखापन दूर होता है। मुठ्ठी भर मूंगफली तमाम पोषक तत्वों को पूरा करती है।
बथुआ में आयरन
सर्दी के मौसम में आसानी से उपलब्ध बथुए के साग को भोजन में अवश्य सम्मिलित करना चाहिए ,बथुए के पतों का साग पराठे,रायता बनाकर या साधारण रूप में प्रयोग किया जाता है कब्ज़ में बथुआ अत्यंत गुणकारी है,अतः जो कब्ज़ से अक्सर परेशां रहते है उन्हें बथुए के साग का सेवन अवश्य करना चाहिए पेट में वायु हो गोला और इससे उत्पन्न सिरदर्द में भी यह आरामदायक है, आँखों में लाली हो या सुजन बथुए के साग के सेवन से लाभ होता है इसके अलावा चरम रोग ,यकृत विकार में भी बथुए के साग के सेवन से लाभ होता है बथुआ रक्त को शुद्ध कर उसमे वृद्धि करता है बुखार और उष्णता में इसका उपयोग बहूत ही कारगर होता है यह आयरन और कैल्सियम का अजस्त्र भंडार है औरतों को आयरनो तथ रक्त बढाने वाले खाद्यपदार्थ की ज्यादा जरूरत होती है अतः उन्हें इसके साग का सेवन विशेष रूप से करना चाहिए खनिज लवणों की प्रचुरता से यह हरा साग-सब्जियां ,शरीर की जीवन शक्ति को बढाने खास लाभकारी होता है इसकी पतियों का रस ठंढी तसिरयुक्त होने के कारण बुखार, फेफड़ों एवं आँतों की सुजन में फायदेमंद है बथुए के रस बच्चों को पिलाने से उनका मानसिक विकाश होता है, बथुए का १०० ग्राम रस निकल कर पीने से पेट के कीड़े मर जाते है रस में थोडा-नमक मिलाकार पीने से पेट के कीड़े मर जाते है रस में थोडा सा नमक मिलाकर इससे ७ दिनतक सेवन करना चाहिये ५० ग्राम बथुए को एक ग्लास पानी में उबल-मसल कर छान कर पीने में स्त्रियों के मानसिक धर्म के गर बड़ी दूर होती है "( पथरी के रोगीओं को बथुए के साग का सेवन नहीं करना चाहिये ,क्युकी इसमें लौह तत्व अधिक होने के कारन पथरी का निर्माण होता है "बथुए के औषधीय महता :-----------बथुए के सेवन अनेक प्रकार के रोगों के निवारण के लिए भी इसका प्रयोग घरेलु औषधि के रूप में भी किया जाता है :- जैसे१. रक्ताल्पता :-- शरीर में रक्त की कमी पर बथुए का साग कुछ दिनों तक करने अथवा इसे आटे के साथ गुन्धकर रोटी बनाकर खाने से रक्त की वृद्धि होती है 2.त्वचा रोग :--- रक्त को दूषित हो जाने से त्वचा पर चकते हो जाते है ,फोड़े,फुंसी निकल आती है ऐसे में बथुए के साग के रक्त में मुल्तानी का लेप बनाकर लगाने से आराम मिलता है साथ में बथुए का साग बनाकर या रस के रूप में सेवन करना चाहिये इससे रक्त की शुद्धि होती है और त्वचा रोगों से छुटकारा मिलता है 3.फोड़ा :- बथुए की पतियों को सोंठ व नमक के साथ पीसकर फोड़े पर बांधने से फोड़ा पककर फुट जाएगा या बैठ जायेगा ४. पीलिया :- कुछ दिनों तक बथुए का साग खाने या सूप बनाकर पीने से पीलिया ठीक हो जाता है ५. पीड़ारहित प्रसव :- बथुआ के १० ग्राम बीजों को कूटकर ५०० मिलीलीटर पानी में मिलाकर उबाले, जब आधा पानी रह जाए तो उतारकर छानकर पियें ,डेलिवरी से २० दिन के पहले से इसका प्रयोग करना चाहिए इसमें बच्चा बिना ओपेरेसन के पैदा हो रहे है और प्रसव पीड़ा भी कम हो जाती है 6.उदार कृमी : - इसके सेवन से पेट के कृमी स्वत मर जाती है 7.जुआं और लीख :- बथुए की पतियों को उबालकर उस उबले हुए पानी से सिर धोने से सिर के सारे जुएँ ख़त्म हो जाते है 8.अनियमित मासिक धर्म :- ५० ग्राम बथुआ की एक ग्लास पानी में उबाल-छानकर नियमित कुछ दिनों तक पीने से तथा उसकी सब्जी बनाकर खाने से बथुआ की सब्जी हमेसा कुकड में बिना मिर्च मसाला के बनाकर खाना चाहिये
Tuesday, February 23, 2010
दाग धब्बे छुड़ाने की विधियाँ
दाग धब्बे छुड़ाने की विधियाँ
हमारे दैनिक जीवन में वस्त्र बहुत आवश्यक हैं और उनसे भी आवश्यक है उनकी देखभाल। वस्त्रों को कितनी ही सावधानी से रखा जाये लेकिन उन पर दाग-धब्बे लग ही जाते हैं जो वस्त्रों की सुन्दरता को खराब कर देते हैं। कपड़ों पर दाग किसी वाह्य वस्तु के संपर्क में आने से लगते हैं। कुछ धब्बे तो पानी व साबुन के प्रयोग से धोकर ही छूट जाते हैं लेकिन कुछ धब्बों को रसायनों के प्रयोग से छुड़ाया जाता है। धब्बों को छुड़ाने की विधि धब्बे की प्रकृति व वस्त्र में मिश्रित तत्व एवं रंग पर निर्भर करती है। धब्बे की प्रकृति धब्बे को देखकर, छूकर, सूँघकर व उसके रंग के अनुसार पता की जा सकती है। कपड़ों पर पड़ने वाले धब्बों की प्रकृति के आधार पर उनको निम्न भागों में बाँटा गया है:- 1) जीव-जन्तुओं से उत्पन्न धब्बे 2) वनस्पतियों द्वारा लगे धब्बे 3) ग्रीस के धब्बे 4) रंग के धब्बे 5) खनिज पदार्थों के धब्बे
1) जीव-जन्तुओं से उत्पन्न धब्बे :इस प्रकार के धब्बे दूध, अंडे, खून व माँस के लग जाने से लगते हैं। इन सब चीजों में प्रोटीन की मात्रा पायी जाती है इसलिए इन धब्बों को हटाते समय अधिक गर्म पानी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
2) वनस्पतियों द्वारा लगे धब्बे :ये धब्बे चाय, कॉफी, फल व सब्जी द्वारा लगते हैं। इन धब्बों को हटाने के लिए क्षारीय पदार्थ की आवश्यकता होती है।
3) ग्रीस के धब्बे :ग्रीस के धब्बे के अन्तर्गत मक्खन, तेल, पेन्ट व कोलतार के धब्बे आते हैं। इन धब्बों को छुड़ाते समय ऐसे रसायनों का प्रयोग करना चाहिए जिसमें ग्रीस आसानी से घुल जाये या ऐसे पाउडर इस्तेमाल करें जैसे चॉक, टेलकम पाउडर, चोकर इत्यादि जो धब्बे को सोख लें।
4) रंग के धब्बे :रंग अम्लीय व क्षारीय दोनों प्रकृति के होते हैं। इसलिए इनको छुड़ाने के लिए इनकी प्रकृति के अनुसार ही रसायन का प्रयोग करना चाहिए।
5) खनिज पदार्थों के धब्बे :खनिज पदार्थों से लगे धब्बे में लोहे, स्याही व दवाइयों के धब्बे आते हैं। इन धब्बों में सबसे पहले अम्ल का प्रयोग करें व बाद में अम्ल को उदासीन करने के लिए क्षार का प्रयोग करें।
धब्बे छुड़ाते समय दो आवश्यक बातें ध्यान रखनी चाहिएः 1) कपड़े का रंग व संगटन। 2) धब्बे की प्रकृति व उम्र।
सामान्य निर्देश :1) हो सके तो धब्बों को ताजी अवस्था में ही शीघ्र छुड़ा लें। 2) कपड़े से दाग या धब्बे छुड़ाते समय कपड़े व धब्बे की प्रकृति के अनुसार ही रसायनों का प्रयोग करें। 3) अगर धब्बे की प्रकृति ज्ञात न हो तो सर्व प्रथम कम हानिकारक प्रक्रिया का प्रयोग करें अगर फिर भी दाग न छूटें तो तेज रसायनों का क्रमबद्ध तरीके से प्रयोग करें -- सबसे पहले वस्त्र को ठंडे पानी में भिगोयें। - उसके बाद गरम पानी में भिगोयें। - उसे खुली हवा में डाल दें। - किसी क्षारीय घोल का प्रयोग करें। - अम्लीय घोल का प्रयोग करें। - अगर दाग फिर भी न छूटे तो ब्लीच का प्रयोग करें। 4) रसायनों को सफेद या सूती लिनन के वस्त्र के ऊपर फैला दें व फिर उसके ऊपर गरम पानी डालें। 5) रंगीन लिनन, ऊन, रेशम व रेयॉन पर केवल घोलों का ही प्रयोग करें। 6) कपड़ों पर रसायन केवल उतनी देर तक ही रखना चाहिए जब तक धब्बा पूर्णतया छूट न जाये, इससे अधिक प्रयोग करने पर कपड़े का रंग खराब होने व फटने का भय रहता है। 7) दाग छुड़ाने के लिए स्पॉजिंग विधि का प्रयोग करें, इस विधि में धब्बे को बाहर से अन्दर की तरफ मलें ताकि वह और न फैले। 8) धब्बे को खुली हवा या खिड़की के पास ही छुड़ायें जिससे कि उत्पन्न होने वाले रसायन कमरे में न फैलें व बाहर निकल सकें। 9) ज्वलनशील रासायनिक पदार्थो जैसे एल्कोहॉल, पेट्रोल, स्प्रिट व बैन्जीन आदि का प्रयोग करते समय आग से बचने के लिए सावधानी रखें। विभिन्न धब्बे छुड़ाने की विधियाँ
क्र०सं०
दाग धब्बे
स्थिति
सफेद सूती एवं लिनन का कपड़ा
1.
स्याही
ताजा
1. दाग पर कटा टमाटर व नमक तब तक रगड़े जब तक दाग हट न जाए। 2. मट्ठे या दही में कपड़े को आधे घण्टे तक भिगोकर पानी एवं साबुन से धो दें। 3. नमक एवं नीबू का रस दाग पर लगाकर आधे घण्टे छोड़ दें। फिर साबुन एवं पानी से धोएँ।
सूखा
1. उपर्युक्त पहली एवं दूसरी प्रक्रिया को अधिक समय तक प्रयोग करें। 2. तनु ऑक्जेलिक एसिड में भिगोकर तनु बोरेक्स के घोल में धोकर निकाल लें।
2.
स्याही (बॉल प्वाइंट पेन)
दाग के नीचे ब्लॉटिग पेपर लगाकर मिथाइलेटेड स्प्रिट डालें।
3.
जंग
ऑक्जेलिक एसिड के घोल में भिगोकर तनु बॉरेक्स के घोल में धोएँ।
4.
लिपस्टिक
मिथाइलेटेड स्प्रिट में भिगोकर साबुन से धोएँ।
ग्लिसरीन में आधा घण्टा भिगोने के बाद धब्बे को साबुन व पानी से धोएँ।
5.
मिट्टी
सूखने दें एवं ब्रश से रगड़कर हटाएँ। साबुन व पानी से धोएँ। यदि दाग फिर भी रह जाए तो पोटैशियम परमैग्नेट तथा ऑक्जेलिक एसिड के घोल में धोएँ।
6.
नेलपेन्ट
रूई की सहायता से एमाइल एसिटेट को दाग लगे भाग पर लगाए। इस विधि का प्रयोग एसीटेट रेयॉन के कपड़े पर नहीं करना चाहिए।
7.
ऑयल पेन्ट तथा वॉर्निश
कैरोसीन में भिगोकर साबुन से धोएँ।
एल्कोहल में भिगोकर साबुन से धोएँ।
8.
बूट पॉलिश
1. यदि दाग सूखा हो तो खुरच कर निकाल दें। थोड़ी ग्रीस लगाकर गर्म पानी एवं साबुन से धो लें। 2. तारपीन के तेल में भिगोकर साबुन से धो लें।
9.
पसीने के दाग
ठंड़े पानी में भिगोएँ।
तनु अमोनिया के घोल में भिगोएँ।
दाग को गीला करके धूप से इसका विरंजन करें। जब तक दाग न छूटे उसे गीला ही रखना चाहिए।
जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
10.
पेय पदार्थ (चाय, कॉफी)
ताजा
गर्म पानी को दाग पर डालें।
सूखा
बोरेक्स पाऊडर और गर्म पानी को दाग पर डालें।
ग्लिसरीन मे तब तक भिगोएँ जब तक कि दाग छूट न जाए। यदि फिर भी दाग न जाए तो जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
11.
खून (प्रोटीन)
ताजा
ठंडे पानी में भिगोकर तनु अमोनिया में धोएँ।
सूखा
नमक व ठंडे पानी में तब तक भिगोएँ जब तक कि दाग हट न जाए।
12.
कत्था एवं पान का दाग
ताजा
पहले तनु पोटैशियम परमैग्नेट का घोल डालें बाद में सोडियम बाइसल्फेट डालें तथा धोएँ।
सूखा
सौलवेन्ट साबुन से धोएँ।
13.
करी (ग्रीस एवं हल्दी)
पानी एवं साबुन के साथ धोएँ।
धूप एवं हवा में विरंजन करें।
जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
14.
मोम
ठोस
जितना संभव हो उतना बिना धार वाले चाकू से खुरच कर निकालें।
दाग पर ब्लॉटिग पेपर रखकर गर्म इस्त्री से दबाए। बेन्जीन से धोएँ।
15.
फल
ताजा
स्टार्च के घोल को दाग पर लगाकर 1 घण्टे के लिए छोड़ दें। स्टार्च को रगड़ कर हटा दें एवं दाग पर गर्म पानी डालें।
सूखा
नमक अथवा बॉरेक्स पाउडर दाग पर फैलाकर उस पर गर्म पानी डालें। प्रक्रिया को दाग के हटने तक दोहराएँ।
जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
16.
घास
मिथाइलेटेड स्प्रिट में भिगोएँ।
साबुन व पानी से धोएँ।
17.
ग्रीस तेल एवं घी
ताजा
साबुन व गर्म पानी से धोएँ।
सूखा
चिकनाई हटाने वाले घुलनशील घोलों का प्रयोग करके साबुन व गर्म पानी से धोएँ।
18.
हल्दी
करी के दाग हटाने की विधियों का प्रयोग करें।
19.
मेंहदी
गर्म दूध में आधे घंटे तक भिगोकर रखें तथा साबुन से धोएँ।
हमारे दैनिक जीवन में वस्त्र बहुत आवश्यक हैं और उनसे भी आवश्यक है उनकी देखभाल। वस्त्रों को कितनी ही सावधानी से रखा जाये लेकिन उन पर दाग-धब्बे लग ही जाते हैं जो वस्त्रों की सुन्दरता को खराब कर देते हैं। कपड़ों पर दाग किसी वाह्य वस्तु के संपर्क में आने से लगते हैं। कुछ धब्बे तो पानी व साबुन के प्रयोग से धोकर ही छूट जाते हैं लेकिन कुछ धब्बों को रसायनों के प्रयोग से छुड़ाया जाता है। धब्बों को छुड़ाने की विधि धब्बे की प्रकृति व वस्त्र में मिश्रित तत्व एवं रंग पर निर्भर करती है। धब्बे की प्रकृति धब्बे को देखकर, छूकर, सूँघकर व उसके रंग के अनुसार पता की जा सकती है। कपड़ों पर पड़ने वाले धब्बों की प्रकृति के आधार पर उनको निम्न भागों में बाँटा गया है:- 1) जीव-जन्तुओं से उत्पन्न धब्बे 2) वनस्पतियों द्वारा लगे धब्बे 3) ग्रीस के धब्बे 4) रंग के धब्बे 5) खनिज पदार्थों के धब्बे
1) जीव-जन्तुओं से उत्पन्न धब्बे :इस प्रकार के धब्बे दूध, अंडे, खून व माँस के लग जाने से लगते हैं। इन सब चीजों में प्रोटीन की मात्रा पायी जाती है इसलिए इन धब्बों को हटाते समय अधिक गर्म पानी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
2) वनस्पतियों द्वारा लगे धब्बे :ये धब्बे चाय, कॉफी, फल व सब्जी द्वारा लगते हैं। इन धब्बों को हटाने के लिए क्षारीय पदार्थ की आवश्यकता होती है।
3) ग्रीस के धब्बे :ग्रीस के धब्बे के अन्तर्गत मक्खन, तेल, पेन्ट व कोलतार के धब्बे आते हैं। इन धब्बों को छुड़ाते समय ऐसे रसायनों का प्रयोग करना चाहिए जिसमें ग्रीस आसानी से घुल जाये या ऐसे पाउडर इस्तेमाल करें जैसे चॉक, टेलकम पाउडर, चोकर इत्यादि जो धब्बे को सोख लें।
4) रंग के धब्बे :रंग अम्लीय व क्षारीय दोनों प्रकृति के होते हैं। इसलिए इनको छुड़ाने के लिए इनकी प्रकृति के अनुसार ही रसायन का प्रयोग करना चाहिए।
5) खनिज पदार्थों के धब्बे :खनिज पदार्थों से लगे धब्बे में लोहे, स्याही व दवाइयों के धब्बे आते हैं। इन धब्बों में सबसे पहले अम्ल का प्रयोग करें व बाद में अम्ल को उदासीन करने के लिए क्षार का प्रयोग करें।
धब्बे छुड़ाते समय दो आवश्यक बातें ध्यान रखनी चाहिएः 1) कपड़े का रंग व संगटन। 2) धब्बे की प्रकृति व उम्र।
सामान्य निर्देश :1) हो सके तो धब्बों को ताजी अवस्था में ही शीघ्र छुड़ा लें। 2) कपड़े से दाग या धब्बे छुड़ाते समय कपड़े व धब्बे की प्रकृति के अनुसार ही रसायनों का प्रयोग करें। 3) अगर धब्बे की प्रकृति ज्ञात न हो तो सर्व प्रथम कम हानिकारक प्रक्रिया का प्रयोग करें अगर फिर भी दाग न छूटें तो तेज रसायनों का क्रमबद्ध तरीके से प्रयोग करें -- सबसे पहले वस्त्र को ठंडे पानी में भिगोयें। - उसके बाद गरम पानी में भिगोयें। - उसे खुली हवा में डाल दें। - किसी क्षारीय घोल का प्रयोग करें। - अम्लीय घोल का प्रयोग करें। - अगर दाग फिर भी न छूटे तो ब्लीच का प्रयोग करें। 4) रसायनों को सफेद या सूती लिनन के वस्त्र के ऊपर फैला दें व फिर उसके ऊपर गरम पानी डालें। 5) रंगीन लिनन, ऊन, रेशम व रेयॉन पर केवल घोलों का ही प्रयोग करें। 6) कपड़ों पर रसायन केवल उतनी देर तक ही रखना चाहिए जब तक धब्बा पूर्णतया छूट न जाये, इससे अधिक प्रयोग करने पर कपड़े का रंग खराब होने व फटने का भय रहता है। 7) दाग छुड़ाने के लिए स्पॉजिंग विधि का प्रयोग करें, इस विधि में धब्बे को बाहर से अन्दर की तरफ मलें ताकि वह और न फैले। 8) धब्बे को खुली हवा या खिड़की के पास ही छुड़ायें जिससे कि उत्पन्न होने वाले रसायन कमरे में न फैलें व बाहर निकल सकें। 9) ज्वलनशील रासायनिक पदार्थो जैसे एल्कोहॉल, पेट्रोल, स्प्रिट व बैन्जीन आदि का प्रयोग करते समय आग से बचने के लिए सावधानी रखें। विभिन्न धब्बे छुड़ाने की विधियाँ
क्र०सं०
दाग धब्बे
स्थिति
सफेद सूती एवं लिनन का कपड़ा
1.
स्याही
ताजा
1. दाग पर कटा टमाटर व नमक तब तक रगड़े जब तक दाग हट न जाए। 2. मट्ठे या दही में कपड़े को आधे घण्टे तक भिगोकर पानी एवं साबुन से धो दें। 3. नमक एवं नीबू का रस दाग पर लगाकर आधे घण्टे छोड़ दें। फिर साबुन एवं पानी से धोएँ।
सूखा
1. उपर्युक्त पहली एवं दूसरी प्रक्रिया को अधिक समय तक प्रयोग करें। 2. तनु ऑक्जेलिक एसिड में भिगोकर तनु बोरेक्स के घोल में धोकर निकाल लें।
2.
स्याही (बॉल प्वाइंट पेन)
दाग के नीचे ब्लॉटिग पेपर लगाकर मिथाइलेटेड स्प्रिट डालें।
3.
जंग
ऑक्जेलिक एसिड के घोल में भिगोकर तनु बॉरेक्स के घोल में धोएँ।
4.
लिपस्टिक
मिथाइलेटेड स्प्रिट में भिगोकर साबुन से धोएँ।
ग्लिसरीन में आधा घण्टा भिगोने के बाद धब्बे को साबुन व पानी से धोएँ।
5.
मिट्टी
सूखने दें एवं ब्रश से रगड़कर हटाएँ। साबुन व पानी से धोएँ। यदि दाग फिर भी रह जाए तो पोटैशियम परमैग्नेट तथा ऑक्जेलिक एसिड के घोल में धोएँ।
6.
नेलपेन्ट
रूई की सहायता से एमाइल एसिटेट को दाग लगे भाग पर लगाए। इस विधि का प्रयोग एसीटेट रेयॉन के कपड़े पर नहीं करना चाहिए।
7.
ऑयल पेन्ट तथा वॉर्निश
कैरोसीन में भिगोकर साबुन से धोएँ।
एल्कोहल में भिगोकर साबुन से धोएँ।
8.
बूट पॉलिश
1. यदि दाग सूखा हो तो खुरच कर निकाल दें। थोड़ी ग्रीस लगाकर गर्म पानी एवं साबुन से धो लें। 2. तारपीन के तेल में भिगोकर साबुन से धो लें।
9.
पसीने के दाग
ठंड़े पानी में भिगोएँ।
तनु अमोनिया के घोल में भिगोएँ।
दाग को गीला करके धूप से इसका विरंजन करें। जब तक दाग न छूटे उसे गीला ही रखना चाहिए।
जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
10.
पेय पदार्थ (चाय, कॉफी)
ताजा
गर्म पानी को दाग पर डालें।
सूखा
बोरेक्स पाऊडर और गर्म पानी को दाग पर डालें।
ग्लिसरीन मे तब तक भिगोएँ जब तक कि दाग छूट न जाए। यदि फिर भी दाग न जाए तो जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
11.
खून (प्रोटीन)
ताजा
ठंडे पानी में भिगोकर तनु अमोनिया में धोएँ।
सूखा
नमक व ठंडे पानी में तब तक भिगोएँ जब तक कि दाग हट न जाए।
12.
कत्था एवं पान का दाग
ताजा
पहले तनु पोटैशियम परमैग्नेट का घोल डालें बाद में सोडियम बाइसल्फेट डालें तथा धोएँ।
सूखा
सौलवेन्ट साबुन से धोएँ।
13.
करी (ग्रीस एवं हल्दी)
पानी एवं साबुन के साथ धोएँ।
धूप एवं हवा में विरंजन करें।
जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
14.
मोम
ठोस
जितना संभव हो उतना बिना धार वाले चाकू से खुरच कर निकालें।
दाग पर ब्लॉटिग पेपर रखकर गर्म इस्त्री से दबाए। बेन्जीन से धोएँ।
15.
फल
ताजा
स्टार्च के घोल को दाग पर लगाकर 1 घण्टे के लिए छोड़ दें। स्टार्च को रगड़ कर हटा दें एवं दाग पर गर्म पानी डालें।
सूखा
नमक अथवा बॉरेक्स पाउडर दाग पर फैलाकर उस पर गर्म पानी डालें। प्रक्रिया को दाग के हटने तक दोहराएँ।
जैवेल वॉटर से विरंजन करें।
16.
घास
मिथाइलेटेड स्प्रिट में भिगोएँ।
साबुन व पानी से धोएँ।
17.
ग्रीस तेल एवं घी
ताजा
साबुन व गर्म पानी से धोएँ।
सूखा
चिकनाई हटाने वाले घुलनशील घोलों का प्रयोग करके साबुन व गर्म पानी से धोएँ।
18.
हल्दी
करी के दाग हटाने की विधियों का प्रयोग करें।
19.
मेंहदी
गर्म दूध में आधे घंटे तक भिगोकर रखें तथा साबुन से धोएँ।
Thursday, February 18, 2010
दूध का upyog
दूध को गुलाब जल में मिलाकर लगाने से त्वचा की रंगत निखरती है। दूध में थोड़ा सा नमक मिलाकर चेहरे पर सुबह-शाम लगाने से मुँहासे दूर होते हैं।बादाम, बेसन, गाजर का रस दूध में मिलाकर उबटन की तरह लगाने से त्वचा में कमनीयता आती है।दूध को पूरे शरीर पर लगाकर रगड़ने से त्वचा में चमक आती है। नाखूनों को सुंदर बनाने के लिए कुछ देर दूध में भिगोकर रखें।बर्तन साफ करने से हाथ खुरदूरे हो जाते हैं, इन पर में दूध में नींबू का रस मिला कर लगाने से आपके हाथ सुंदर होंगे।होंठों का कालापन दूर करने के लिए दूध को होंठ पर प्रतिदिन लगाएँ। आधा चम्मच काला तिल और आधा चम्मच सरसों को बारीक पीसकर दूध में मिलाकर मुँहासे पर निरंतर लगाने से फायदा होता है। चिरौंजी को दूध के साथ पीसकर लगाने से त्वचा चमकदार बनती है।
महेंदी का कंडीशनर
यदि आप कंडीशनर का प्रयोग करना चाहते हैं परंतु इसकी प्रक्रिया आपको झंझट भरी लगती है तो आप आयुर्वेदिक डीप कंडीशनर का प्रयोग 20 दिन में एक बार करें। आप इस कंडीशनर को स्वयं घर पर झटपट बना सकते हैं तथा 20 मिनट में बालों की डीप कंडीशनिंग कर सकते हैं। निर्माण विधि एवं प्रयोग विधि- आधा कटोरी हरी मेहँदी पावडर लें। इसमें गर्म दूध (गाय का) डालकर पतला लेप बना लें। इसी लेप में एक बड़ा चम्मच आयुर्वेदिक हेयर ऑइल डालें। इसे अच्छी तरह से मिला लें। जब यह लेप ठंडा हो जाए तब बालों की जड़ों में लगाएँ। 20 मिनट छोड़कर आयुर्वेदिक शैंपू पानी में घोलकर बालों को धो लें। इस डीप कंडीशनर द्वारा आपके बालों को पोषण भी मिलेगा एवं उसमें बाउंस (लोच) भी आ जाएगा।
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